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Hindi Poetry

आधुनिक ज़माने के शिकवे — रिश्तों और जीवन की एक कड़वी सच्चाई

2026-09-19 00:00:00
आधुनिक ज़माने के शिकवे — रिश्तों और जीवन की एक कड़वी सच्चाई
आधुनिक रिश्तों में बढ़ते शिकवों, बदलते लहज़ों और अपनों से बढ़ती दूरियों पर आधारित शिवांश सिंह की हिंदी कविता। यह रचना रिश्तों की सच्चाई, अकेलेपन और जीवन की अंतिम सच्चाई को भावपूर्ण तरीके से व्यक्त करती है।
आधुनिक ज़माने के यूँ बढ़ते हुए शिकवे, इंसान के लहजे में बदलाव के वो शिकवे, अक्सर ये शिकवे इंसान को अपनों से दूर कर जाते हैं, अंत में इंसान के अपने भी उन्हें चिता पर जलता छोड़ जाते हैं। — शिवांश सिंह Author | Writer | Storyteller