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Shayari

अपनों से उम्मीदें — जब अपने ही हाल पर छोड़ जाएँ

2026-10-06 00:00:00
अपनों से उम्मीदें — जब अपने ही हाल पर छोड़ जाएँ
अपनों से उम्मीद, उनके करीब होने की चाहत और बार-बार टूटती उम्मीदों के दर्द को बयां करती शिवांश सिंह की भावपूर्ण हिंदी शायरी। यह रचना उस एहसास को व्यक्त करती है जब हम किसी को समझना चाहते हैं, लेकिन अंत में वही हमें हमारे हाल पर छोड़ जाते हैं।
क्या होता है अपनों से उम्मीदें खोना, क्या होता है अपनों से दूर होना? क्या तुम आज भी उनसे उम्मीद लगाए बैठे हो, क्या तुम आज भी सच सुनने की आस लगाए बैठे हो? अगर तुम सच में होते उनके अपने, क्या वो यूँ ही तोड़ देते तुम्हारे सपने? तुम तो चाहते थे बस उनको जानना, तुम तो चाहते थे बस उनको समझना, उनके हर दर्द को अपना मानना, और शायद चाहते थे कि वो भी समझें तुम्हें अपना। क्या जितना तुम उनके लिए तड़पते थे, क्या उतना ही वो भी तुम्हें याद करते थे? जब तुम उनसे उम्मीद लगाए बैठे थे, वो तुम्हें तुम्हारे हाल पर छोड़ गए थे। — शिवांश सिंह Author | Writer | Storyteller