Poetry
बेचैन — एक कविता
2026-09-13 00:00:00
कुछ एहसास, कुछ यादें और किसी के पास न होने का दर्द इंसान को भीतर तक बेचैन कर जाता है। “बेचैन” एक ऐसी कविता है, जिसमें प्रेम, याद, विरह और महादेव से अगले जन्म में अपने प्रिय के साथ की एक ख्वाहिश को शब्द दिए गए हैं।
सुबह उठकर चिड़ियों का चहचहाना,
हमें यूँ बेचैन सा कर जाता है।
रात को सोने से पहले उनको याद करना,
हमें यूँ बेचैन सा कर जाता है।
हम यूँ अकेलेपन में आपको इतना याद करते हैं,
कि हमारे पास किसी का आ जाना भी
बेचैन सा कर जाता है।
मैं तो चाहूँ सिर्फ तेरे ख्यालों में खोए रहना,
मैं तो चाहूँ सिर्फ और सिर्फ
तेरे ख्यालों में खोए रहना।
लेकिन तुम्हारे पास न रह पाने का दर्द,
यूँ बेचैन सा कर जाता है।
अगर माँग सकूँ तो माँगूँ महादेव से,
फिर से अपना दूसरा जन्म।
अगर माँग सकूँ तो माँगूँ महादेव से,
अपने अगले जीवन में तेरा संग।
मैं अगर जन्म लूँ दोबारा,
तो तुम मिल जाना बस मुझे।
इस जन्म में तेरा हमेशा मेरे साथ न रहना,
बेचैन कर जाता है मुझे,
बहुत बेचैन कर जाता है।
सच कहूँ तो तुम मेरी
मन्नत, इबादत और ख्वाहिश बन चुकी हो।
मेरे ज़िंदा रहने और मेरे खुश रहने की
सौगात बन चुकी हो तुम।
लेकिन जैसे ही याद आता है
कि मैं तुम्हारे पास नहीं हूँ,
बहुत बेचैन कर जाती हो मुझे...
बहुत बेचैन कर जाती हो।
— शिवांश सिंह