खुद से नाराज़ हो क्या?
2026-09-11 00:00:00
कभी-कभी इंसान भीड़ में रहकर भी अपने भीतर अकेला होता है। कुछ भाव ऐसे होते हैं जिन्हें कहने के लिए शब्द नहीं, बस किसी अपने की ज़रूरत होती
यूँ शांत-शांत सा बैठे हो,
खुद से नाराज़ हो क्या?
मन में सब कुछ छुपाए बैठे हो,
खुद से परेशान हो क्या?
अगर हो तो भूल जाओ,
कि कोई सुनने आएगा तुमको।
इस कलयुग के ज़माने में भी,
साँवरे जैसे किसी के इंतज़ार में बैठे हो क्या।