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मोहब्बत / प्रेम

मुकद्दर को कहाँ पता कि तुम कहाँ जाओगे?

2026-09-23 00:00:00
मुकद्दर और अधूरी मोहब्बत पर शिवांश सिंह की हिंदी कविता
कुछ मोहब्बतें मुकद्दर में नहीं होतीं, फिर भी उम्रभर दिल में रहती हैं... कुछ लोग दूर चले जाते हैं, मगर उनकी यादें कभी दूर नहीं जातीं। ❤️
मुकद्दर को कहाँ पता कि तुम कहाँ जाओगे, जब जाओगे तो लौट के फिर वापस आओगे? यूँ ही मोहब्बत में कोई सब कुछ लुटाता नहीं, चाह के भी किसी को कोई भुला पाता नहीं। कुछ मोहब्बतें मुकद्दर में नहीं होतीं, फिर भी उम्रभर दिल में रहती हैं... कुछ लोग दूर चले जाते हैं, मगर उनकी यादें कभी दूर नहीं जातीं। ❤️